माँ और पापा… दो ऐसे नाम जिनके बिना हमारी life की story अधूरी है। माँ की ममता और पापा की हिम्मत मिलकर हमें इंसान बनाती है। कविता “Maa-Baap Ka Aasheesh” उन्हीं silent sacrifices, unconditional love और उस blessing को शब्द देती है जो हर कदम पर हमारे साथ रहती है। यह poem gratitude, respect और emotional bonding का सच्चा reflection है।
माँ – बाप का आशीष………….

माँ ने मुझे बोलना सिखाया
पापा ने आवाज उठाना सिखाया
माँ ने मुझे चलना सिखाया
पापा ने मुझे दौड़ना सिखाया
जब मैं कभी गिर गया
दोनों ने हाथ पकड़कर उठाया
माँ ने मुझे मेहनत करना सिखाया
पापा ने हमेशा मेरा हौंसला बढ़ाया
जब मैं कभी थक गया
दोनों ने पास बैठकर सुलाया
माँ ने मुझे सिर झुकाना सिखाया
पापा ने बुराई से लड़ना सिखाया
जब मैं कभी उलझ गया
दोनों ने मिलकर समझाया
माँ – पापा दोनों ने
मेरे लिए एक सपना संजोया
आज मैं खड़ा हूँ जिस जगह
यहाँ मुझे माँ और पापा ने पहुँचाया…………..
सुरेश के
सुर…………..
Blessing of parents…………

Mother taught me to speak.
Father taught me to raise my voice.
Mother taught me to walk.
Father taught me to run.
Whenever I fell,
both of them held hands and raised.
Mother taught me to work hard.
Father always encouraged me.
Whenever I got tired,
both of them slept me sitting together.
Mother taught me to bow my head.
Father taught me to fight evil.
Whenever I got into trouble,
both of them explained together.
Mother and father both
cherished a dream for me.
The place where I stand today,
my mother and father
brought me here…………..
Suresh Saini
यह कविता हमें याद दिलाती है कि आज हम जो भी हैं, उसमें माँ-पापा का आशीर्वाद सबसे बड़ी ताकत है।
अगर इस poem ने आपके दिल में thankfulness जगा दी हो, तो इसे जरूर Share करें और Comment में बताएं—आपके लिए माँ-पापा की सबसे बड़ी सीख क्या है?
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